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एन.एम.डी.सी.
लिमिटेड (भारत
सरकार का
उद्यम) खनिज
भवन, मासब
टैंक,
हैदराबाद –
500 173, भारत दूरभाष
: +91-40-23538713
– 20 Fax : +91-40-23538711 Telex
: 0425 – E-mail
: hois@nmdc.co.in एन.एम.डी.सी.
एक दृष्टि
में भारत सरकार का पूर्ण स्वामित्व प्राप्त सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यम के रूप में, 1958 में एन.एम.डी.सी. लिमिटेड की स्थापना हुई। यह भारत सरकार के इस्पात एवं खनन मंत्रालय, इस्पात विभाग के प्रशासनिक नियंत्रण में है। प्रारंभ से ही खनिजों की विस्तृत श्रृंखला का गवेषण होता था, जिसमें लौह अयस्क, कॉपर, रॉक फास्फेट, चूना-पत्थर, डोलोमाईट, जिप्सम, बेनटोनाईट, मेगनेसाईट, हीरा, टिन, टंगस्टन, ग्रेफाईट, बीच सैंड आदि शामिल हैं। यह भारत का एकमात्र सबसे बड़ा लौह अयस्क का उत्पादक एवं निर्यातक है, जो वर्तमान में पूर्ण रूप से तीन यंत्रीकृत खानों यथा – बैलाडीला निक्षेप – 14/11सी, बैलाडीला निक्षेप – 5, 10/11ए (छत्तीसगढ़) तथा दोणिमलै लौह अयस्क खानों (कर्नाटक राज्य) में हैं, 30 मिलियन टन लौह अयस्क का उत्पादन कर रहा है, जिन्हें आईएसओ 9001 – 2000 प्रमाणन दिया गया है। देश में केवल एन.एम.डी.सी. लिमिटेड, पन्ना (मध्यप्रदेश) में एकमात्र यंत्रीकृत हीरा खान का प्रचालन कर रहा है, जिसमें लगभग एक लाख कैरेट प्रतिवर्ष का उत्पादन होता है। एमपीपीसीबी के निदेशों के अनुसार 22-08-2005 से वर्तमान में खनन प्रचालन बंद था। यह मामला सुलझाया गया और एनएमडीसी की पन्ना हीरा खान, जो एशिया की एकमात्र यांत्रिकृत हीरा खान है, को भारत के उच्चतम न्यायालय द्वारा अनुमति प्रदान किए जाने पर पुन: आरंभ किया गया। इस परियोजना को माननीय केन्द्रीय इस्पात मंत्री श्री वीरभद्र सिंह ने दिनांक 21 अगस्त, 2009 को राष्ट्र को पुन: समर्पित किया। आईएसओ 9001 प्रमाणित अनुसंधान विकास केन्द्र महत्वपूर्ण है, जिसे यूएनआईडीओ के विशेषज्ञ समूह द्वारा खनिज संसाधन के क्षेत्र में ‘’उत्कृष्टता का केन्द्र’’ घोषित किया गया है।
लगातार लाभ देने तथा लाभांश का भुगतान करने वाली कंपनी।
एन.एम.डी.सी. लिमिटेड की कहानी पौराणिक काल से दण्डकारण्य के रूप में जानी जाने वाली मध्यप्रदेश में बस्तर की धरती की स्वप्नमयी पहाडि़यों के इर्दगिर्द बुनी हुई है। बैलाडीला लौह अयस्क श्रृंखला – स्थानीय भाषा में – ‘बैल का डीला’ पहले दूरस्थ, अगम्य और वन्यजीवन से परिपूर्ण था। इस श्रृंखला में 1200 मिलीयन टन का उच्च श्रेणी का लौह अयस्क है, जो 14 निक्षेपों में फैला हुआ है। एन.एम.डी.सी. लिमिटेड द्वारा खानों को आरंभ करने से इस सम्पूर्ण क्षेत्र को सभ्यता की मुख्य धारा में लाया गया है। आज बैलाडीला की अपने उत्तम श्रेणी के लौह अयस्क के कारण विश्व बाजार में गिनती की जाती है। बैलाडीला परिक्षेत्र सल्फर और अन्य डेलीटीरीयस सामग्री के रहित तथा इस्पात बनाने के लिए आवश्यक भौतिकी गुण धर्म वाला विश्व का सबसे उत्तम श्रेणी का सख्त +66% लौहांश के साथ पिण्ड अयस्क का मालिक है। एन.एम.डी.सी. लिमिटेड वर्तमान में अपने बैलाडीला क्षेत्र की खानों से 22 मिलीयन टन तथा दोणिमलै क्षेत्र से 7 मिलीयन टन लौह अयस्क का उत्पादन कर रहा है। यह अपने उत्कृष्ट रासायनिक और धातुकर्मीय गुणधर्मों के कारण बैलाडीला निक्षेप से प्राप्त केलीब्रेटिड अयस्क, स्पंज लौह आयरन की तैयारी में उपयोग किए जाने वाले अयस्क पेलेट्स का विकल्प बन गया है और इसलिए तीन बड़े गैस पर आधारित स्पंज लौह इस्पात उत्पादक यथा – इस्सार स्टील, इस्पात इण्डस्ट्रीज तथा विक्रम इस्पात के लिए महत्वपूर्ण कच्ची सामग्री प्रदान कर रहा है। इन तीनों के अलावा विशाखापट्टणम इस्पात संयंत्र की सभी जरूरतें बैलाडीला से पूरी होती है। इस्पात के लिए आगामी वर्षों में मांग बढ़ती रहेगी और लौह अयस्क की मांग में भी वृद्धि होती रहेगी। एन.एम.डी.सी. लिमिटेड अपनी वर्तमान खानों से तथा बैलाडीला क्षेत्र में निक्षेप 11बी तथा दोणिमलै क्षेत्र में कुमारस्वामी में नई खानें शुरू कर संभावित मांग में हुई वृद्धि को पूरा करेगा। यह अपनी उत्पादन क्षमता को 2014-15 तक प्रतिवर्ष लगभग 50 मिलीयन टन तक बढ़ाएगा। इसके
साथ ही
एनएमडीसी
लिमिटेड निम्नांकित
खनन पट्टों (कुछ
राज्य
सरकार के साथ
संयुक्त
वेंचर) को
प्राप्त
करने की
प्रक्रिया
में भी है
:
ससानगढ़
लौह अयस्क
निक्षेप,
झारखण्ड
घाटकुरी
खान, झारखण्ड
रमनदुर्ग,
कर्नाटक
निक्षेप-13,
बैलाडीला, छत्तीसगढ़
निक्षेप-4,
बैलाडीला,
छत्तीसगढ़
लौह अयस्क के अलावा एनएमडीसी जम्मु में मेग्नेसाइट खान और हिमाचल प्रदेश में अर्की चूना पत्थर परियोजना को विकसित कर रहा है। मूल्य संवर्धन के लिए एनएमडीसी जगदलपुर में प्रतिवर्ष 3.00 मिलियन टन का स्टील प्लांट और दोणिमलै में (प्रतिवर्ष 1.2 मिलियन टन) और बचेली में (प्रतिवर्ष 1.2 मिलियन टन) के 2 पेलेट संयंत्रों को विकसित करने की प्रक्रिया में है। इसके साथ ही बिल्यट्स उत्पादन की विस्तार योजना सहित एनएमडीसी स्पंज लौह इंडिया लिमिटेड के विलयन की प्रक्रिया में भी है। लौह अयस्क के साथ ही एनएमडीसी की अन्य खनिजों जैसे कोयला, हीरा, स्वर्ण आदि में प्रवेश की भी योजना है, जिसके लिए पट्टे/विदेशों से सीधे सम्पत्ति क्रय/विशेष उद्देश्य वैहिक्ल/संयुक्त वेंचर के लिए प्रयास कर रहा है। एनएमडीसी लिमिटेड ने अपनी गवेषण गतिविधियों को जारी रखने के लिए रायपुर, छत्तीसगढ़ में ग्लोबल एक्सप्लोरेशन सेंटर की स्थापना की है। एनएमडीसी लिमिटेड अपने अनु एवं विकास के गहन प्रयासों के माध्यम से ब्लु डस्ट से कार्बन मुक्त स्पंज लौह चूर्ण, नॉनों क्रिस्टेलाईन चूर्ण जैसे उच्च तकनीक एवं उच्च मूल्य संवर्धन उत्पादों के विविधीकरण की गतिविधियों को हाथ में ले रहा है। इसके साथ ही + 64 एफ ई लौह अयस्क तक कान्सन्ट्रेशन में वृद्धि के लिए बीएचजे/बीएचक्यू सामग्री की लाभकारिता हेतु प्रायोगिक संयंत्र की स्थापना के लिए अध्ययन किया जा रहा है। एनएमडीसी पर्या हितैषी निवेश के रूप में ‘’ऊर्जा स्रोतों के नवीकरण’’ के विकास में भी निवेश कर रहा है। कर्नाटक में एक विंड मिल परियोजना (10.5 मेगा वॉट की क्षमता) को पूरा किया गया और इसे आरंभ किया गया। एनएमडीसी लिमिटेड ने हमेशा से पर्यावरण संरक्षण पर विशेष ध्यान दिया है। विभिन्न स्थानों पर वृक्षारोपण, टेलिंग डेम/चेक डेम बना कर इसकी सभी परियोजनाओं ने इस संबंध में ध्यान रखा है। |
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कापी
राईट @2007NMDC.CO.IN सभी
अधिकार
सुरक्षित
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